अरब सागर में अमेरिका की सनसनीखेज एंट्री: बलूचिस्तान के पसनी में 1200 करोड़ से बनेगा अमेरिकी पोर्ट, चीन-ईरान की बढ़ी टेंशन!

अरब सागर में अमेरिका की सनसनीखेज एंट्री: बलूचिस्तान के पसनी में 1200 करोड़ से बनेगा अमेरिकी पोर्ट, चीन-ईरान की बढ़ी टेंशन!

अरब सागर में अमेरिका की सनसनीखेज एंट्री: बलूचिस्तान के पसनी में 1200 करोड़ से बनेगा अमेरिकी पोर्ट, चीन-ईरान की बढ़ी टेंशन!

इस्लामाबाद: दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व के समुद्री मुहाने पर एक बड़ा भू-राजनीतिक (Geopolitical) उलटफेर सामने आया है। अमेरिका ने अरब सागर में सीधी एंट्री मार ली है और पाकिस्तान ने बलूचिस्तान के रणनीतिक पसनी (Pasni) में पोर्ट विकसित करने के लिए अमेरिका को हरी झंडी दे दी है। कराची नेवल बेस पर अमेरिकी नेवी के आला अफसरों और पाक नौसेना प्रमुख नावेद अशरफ के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक में इस महाडील को अंतिम रूप दिया गया। अमेरिकी इंफ्रा कंपनी लगभग ₹1,200 करोड़ की लागत से इस पोर्ट को विकसित करेगी, जिसका काम दिसंबर से शुरू होने जा रहा है। इस प्रोजेक्ट में पाकिस्तानी नौसेना भी पूरा सहयोग करेगी।

ग्वादर और चाबहार के ठीक बीच में अमेरिकी ठिकाना

पसनी पोर्ट की लोकेशन बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह चीन के नियंत्रण वाले बलूचिस्तान के ग्वादर पोर्ट और भारत द्वारा विकसित ईरान के चाबहार बंदरगाह के बिल्कुल करीब स्थित है। अमेरिका के इस कदम के पीछे दो बड़े रणनीतिक मकसद देखे जा रहे हैं:

  1. पसनी पोर्ट के जरिए ईरानी ऑयल ट्रेड पर पैनी नजर रखना।

  2. बलूचिस्तान से बहुमूल्य रेअर मिनरल्स (Rare Earth Minerals) के शिपमेंट के लिए सीधा और सुरक्षित रूट हासिल करना।

चीन को झटका, भारत और क्षेत्र पर असर

चीन ने सीपीईसी (CPEC) के तहत ग्वादर में भारी निवेश किया है, लेकिन बलूच विद्रोहियों के हमलों के चलते वह प्रोजेक्ट फायदे का सौदा साबित नहीं हो पा रहा। पाकिस्तान ने अब अमेरिका को एंट्री देकर बीजिंग को भी कड़ा संदेश दे दिया है। वहीं, भारत ने चाबहार में भारी निवेश किया था, लेकिन इस क्षेत्र में अब चीन के साथ-साथ अमेरिका की सीधी मौजूदगी क्षेत्रीय सुरक्षा और भारत के कूटनीतिक हितों के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर सकती है।

दूसरी ओर, इस समझौते को लेकर बलूचिस्तान के स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी और विरोध शुरू हो गया है। बलूच संगठनों का साफ कहना है कि पहले चीन और अब अमेरिका की घुसपैठ उनके प्राकृतिक संसाधनों की लूट है, जबकि स्थानीय रेअर अर्थ मिनरल्स पर पहला हक बलूच जनता का है।